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इग्नू ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर कराया वेबीनार का आयोजन Picks

 
पुखरायां कानपुर देहात कस्बा स्थित रामस्वरूप ग्रामोद्योग परास्नातक महाविद्यालय पुखरायां कानपुर देहात में संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय इग्नू अध्ययन केंद्र एवं इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ के संयुक्त तत्वाधान में आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर स्वामी जी के जीवन एवं दर्शन पर प्रकाश डालने हेतु वेबीनार का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो अनुराधा सिंह इतिहास विभाग बनारस हिंदू विश्वविद्यालय काशी, कार्यक्रम के अध्यक्षता डॉ अनिल कुमार मिश्रा वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक इग्नू क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ, कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक डॉ रीना कुमारी, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह प्राचार्य महाविद्यालय पुखरायां। वहीं डॉ अनुराधा सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि 11 सितंबर 1893 को शिकागो के धर्म सम्मेलन में भारत की जिस संस्कृति एवं आत्मा का परिचय पूरी स्वतंत्रता से विवेकानंद ने कराया वह भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण था। भारत का हर युवा जो आज अपने एवं देश के प्रति उदासीन नहीं दिखता वह भी यदि विवेकानंद को पढ़े समझे एवं जाने तो राष्ट्र के प्रति समर्पित होगा और भारत के प्रधानमंत्री का लक्ष्य विकसित भारत की संकल्पना को साकार करेगा।


विवेकानंद की सोच थी कि "आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक" नहीं इसलिए आत्मा की आवाज सुनो उठो जागो ज्ञान प्राप्त कर संघर्ष करो लक्ष्य की प्राप्ति तक ठहरो मत।   डॉ अनिल कुमार मिश्रा ने युवाओं से आवाहन किया कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाना है,और वह साकार तभी होगा जबकि युवा ज्ञान विज्ञान, संस्कृति एवं चरित्र से सवल होगा। इसके लिए विवेकानंद द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करना होगा।  प्राचार्य प्रोफेसर हरीश कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर से जब यूरोप के विद्वान ने पूछा कि भारत कैसा है इसको हमें जानना समझना है। तो रविंद्र नाथ टैगोर ने कहा कि भारत को जानने के लिए रामकृष्ण परमहंस को जानना होगा, और रामकृष्ण परमहंस को जानने के लिए विवेकानंद को जानना होगा। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस कहते थे विवेकानंद को जानने के लिए जब आप चारपाई पर लेटे-लेटे उनके दर्शन को जानने का प्रयास करते हैं तो उठकर बैठ जाते हैं, और जब बैठे-बैठे जानने का प्रयास करते हैं तो उठकर खड़े हो जाते हैं, और जब खड़े होकर विवेकानंद को जानना चाहते हैं तो आप विवेकानंद के बताए हुए मार्ग पर चल पड़ते हैं। अर्थात विवेकानंद युवाओं के लिए एक चेतना के स्रोत है। 

डॉ रीना कुमारी ने कहा कि विवेकानंद संपूर्ण भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के मानव के अंदर जो आत्मा है उसमें नारायण का दर्शन उसकी सेवा के रूप में प्राप्त करते हैं। अर्थात मानव सेवा ही सर्वोपरि धर्म है।  आभार प्रदर्शन करते हुए समन्वयक डॉ पर्वत सिंह ने कहा कि विवेकानंद के चरित्र, योग, शक्ति वेदांत  दर्शन को समझना होगा जिसमें विवेकानंद युवाओं से जागृत होकर लक्ष्य प्राप्त के लिए योग करने की बात करते हैं। इस अवसर पर डॉ कीर्ति विक्रम सिंह, डॉ अनामिका सिन्हा, डॉ निशीथ नागर, महाविद्यालय के एनसीसी कैडेट्स सहित विभिन्न अध्ययन केंद्र के समन्वयक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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